रायपुर। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन से राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'हर घर नल' (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना से न केवल महिलाओं के समय की बचत होगी, बल्कि जलजनित बीमारियों में भारी कमी आएगी और स्वच्छता प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

पूर्ण कार्यों का 31 अगस्त तक हो सत्यापन:

मुख्य सचिव ने समीक्षा के दौरान सख्त निर्देश दिए कि जिन नल-जल योजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन कराकर ठेकेदारों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। वहीं, जो योजनाएं अभी अधूरी हैं, उन्हें हर हाल में 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि कार्य में ढिलाई या लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जलस्रोतों का संरक्षण और वैकल्पिक व्यवस्था:

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में जलस्रोतों का सटीक आकलन करें और वाटर रिचार्ज (भू-जल संरक्षण) की ठोस कार्ययोजना बनाएं। जिन क्षेत्रों में वर्तमान जलस्रोतों से पानी आपूर्ति संभव नहीं है, वहां त्वरित रूप से वैकल्पिक स्रोतों की पहचान की जाए। उन्होंने योजनाओं को गति देने के लिए जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद व विधायक निधि, और CSR जैसे स्थानीय वित्तीय संसाधनों का उपयोग करने के निर्देश दिए।

नियमित मॉनिटरिंग और समन्वय:

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिला जल एवं स्वच्छता समिति की मासिक बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएं और इसकी प्रोसीडिंग पोर्टल पर अपलोड हो। इस उच्चस्तरीय बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित सभी जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।