बारिश के मौसम में सड़क किनारे अंगारों पर सिकता हुआ भुट्टा लोगों की पहली पसंद बन जाता है। स्वाद के साथ-साथ भुट्टा पोषण से भरपूर भी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में तली-भुनी चीजों की तुलना में भुट्टा अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें फाइबर, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
भुट्टा पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, लंबे समय तक पेट भरा रखने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या को कम करने में सहायक हो सकता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में योगदान देते हैं।
हालांकि, हर व्यक्ति के लिए भुट्टा समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं, गैस, पेट फूलने की शिकायत या गंभीर आंत संबंधी रोग हैं, उन्हें सीमित मात्रा में ही भुट्टा खाना चाहिए। वहीं, मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों को भी अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मानसून में हमेशा ताजा और अच्छी तरह भुना या उबला हुआ भुट्टा ही खाएं। खुले में लंबे समय तक रखा हुआ या अस्वच्छ तरीके से तैयार किया गया भुट्टा खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। संतुलित मात्रा में और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए भुट्टे का सेवन मानसून में स्वाद और सेहत दोनों के लिए लाभदायक हो सकता है।