भुवनेश्वर/रायपुर, 11 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले कई वर्षों से चले आ रहे संवेदनशील महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में एक बहुत बड़ी और सकारात्मक पहल सामने आई है। लंबे समय से कानूनी उलझनों में फंसे इस मामले का रास्ता अब आपसी बातचीत से साफ होता नजर आ रहा है। महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (Tribunal) के समक्ष हुई हालिया सुनवाई के दौरान दोनों पड़ोसी राज्यों ने अदालत के बाहर आपसी सहमति और समन्वय से इस विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने की तीव्र इच्छा जताई है।
ओडिशा के टेबल टॉक प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ राजी
ट्रिब्यूनल में हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान दोनों राज्यों के रुख में बड़ा बदलाव देखा गया:
ओडिशा की पहल: सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से एक प्रस्ताव रखा गया, जिसमें ट्रिब्यूनल की कानूनी कार्यवाही से अलग दोनों राज्यों के तकनीकी दल और मुख्यमंत्रियों के स्तर पर बैठकर पानी के बंटवारे का व्यावहारिक फार्मूला तैयार करने की बात कही गई।
छत्तीसगढ़ की मुहर: ओडिशा सरकार के इस सकारात्मक और द्विपक्षीय बातचीत के प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी बिना किसी देरी के अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। छत्तीसगढ़ का मानना है कि संघवाद की भावना के तहत पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसे मुद्दों का हल मेज पर बैठकर अधिक प्रभावी ढंग से निकाला जा सकता है।
क्यों अहम है यह सहमति?
महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी और ओडिशा की मुख्य जीवन रेखा माना जाता है। मानसून के दौरान पानी के बहाव, गैर-मानसून महीनों में पानी के भराव और दोनों राज्यों द्वारा बनाए गए बांधों व बैराजों को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। इस मामले के ट्रिब्यूनल में जाने के बाद से दोनों राज्यों के बीच विकास कार्य और पानी का समुचित उपयोग प्रभावित हो रहा था। अब दोनों सरकारों के लचीले और सहयोगात्मक रुख से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में दोनों राज्यों के किसान और आम जनता को इस विवाद से स्थाई रूप से राहत मिल जाएगी।