रायपुर, 10 जुलाई 2026। रायपुर नगर पालिक निगम के सभी जोनों में सफाई व्यवस्था के नाम पर प्लेसमेंट एजेंसियों को अनुचित लाभ पहुंचाने और जनता के टैक्स के पैसों का करोड़ों रुपये का वित्तीय भ्रष्टाचार करने का एक संगठित ढांचा सक्रिय है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों और अधिकारियों की कार्यशैली ने इस महाघोटाले और प्रशासनिक अराजकता की पोल खोलकर रख दी है। यह गंभीर आरोप प्रद्युम्न शर्मा (प्रदुमन शर्मा) ने नगर निगम प्रशासन पर लगाए हैं।
प्रद्युम्न शर्मा ने रायपुर नगर निगम आयुक्त को सौंपे अपने शिकायती पत्र में मुख्य निविदा शर्तों जैसे—सफाई कर्मियों के ड्रेस, स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा सत्यापित आई.डी. कार्ड, सुरक्षा उपकरण और सामग्री क्रय के बिलों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। लेकिन विभिन्न जोनों के जन सूचना अधिकारियों द्वारा दी गई निरंक (शून्य) जानकारी या जानकारी छुपाने के रवैये से स्पष्ट है कि धरातल पर बिना कोई सामग्री बांटे ठेकेदारों के करोड़ों के फर्जी बिल पास किए जा रहे हैं।
जोनवार गड़बड़ियां: सूचना अधिकार को बनाया तमाशा
दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर प्रद्युम्न शर्मा ने अलग-अलग जोनों की प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी के चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए हैं:
जोन 02, 03, 04, 05, 06, 07 और 10: इन जोनों ने लिखित में स्वीकार किया है कि उनके स्वास्थ्य विभाग के पास ठेकेदारों द्वारा खरीदी गई सामग्री के बिल या सफाई कर्मचारियों के आई.डी. कार्ड का कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।
जोन 01: यहाँ के जन सूचना अधिकारी ने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की नीयत से आज दिनांक तक कानून का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए कोई जानकारी ही प्रदान नहीं की है।
जोन 08: इस जोन ने बिना मूल आवेदन को पढ़े, एक महीने की देरी से पूरी तरह भ्रामक, अपूर्ण और अप्रासंगिक दस्तावेज थमा दिए, जिनका धरातल पर हुए सामग्री वितरण के रिकॉर्ड से कोई संबंध ही नहीं है।
जोन 09: इस जोन द्वारा प्रथम अपीलीय अधिकारी (अपर आयुक्त) की सुनवाई के दौरान कानूनन जिम्मेदार अधिकारी के बजाय एक 'ग्रेड-03' स्तर के गैर-जिम्मेदार कर्मचारी को भेज दिया गया, जिसे प्रकरण की कोई समझ ही नहीं थी।
महापौर की लाचारी का दिया हवाला, आयुक्त की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रद्युम्न शर्मा ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब स्वयं माननीय महापौर सार्वजनिक रूप से यह पीड़ा व्यक्त कर चुकी हैं कि "नगर निगम के अधिकारियों पर कोई अंकुश नहीं है", तो ऐसे में बिना भौतिक सत्यापन के ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के बिल पास करने वाले और सूचना अधिकार जैसी वैधानिक प्रक्रिया को तमाशा बनाने वाले अधिकारियों पर अब तक कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या वाकई निगम आयुक्त का अपने मातहतों पर नियंत्रण नहीं रह गया है?
मामले की लीपापोती हुई तो दिल्ली तक जाएगी शिकायत
प्रद्युम्न शर्मा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस प्रमाणित घोटाले पर स्थानीय स्तर पर लीपापोती की गई या दोषी अधिकारियों को संरक्षण दिया गया, तो सफाई कामगारों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए विस्तृत साक्ष्यों के साथ माननीय केंद्रीय नगरीय विकास मंत्री (भारत सरकार), केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (दिल्ली) तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नामजद शिकायत भेजी जाएगी। इसके बाद होने वाली किसी भी केंद्रीय या वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई के लिए रायपुर नगर निगम प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।