रायपुर: नगर पालिक निगम रायपुर में सफाई ठेके के नाम पर हो रहे करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार, फर्जी कर्मचारियों की सूची और करदाताओं के पैसों के दुरुपयोग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा चलाई जा रही मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अनुमोदन के परिपालन में नगर पालिक निगम रायपुर द्वारा संपूर्ण शहर को चार मुख्य क्लस्टरों में विभाजित कर मुख्यालय स्तर से 05 वर्षों हेतु नवीन स्वच्छता कार्य का टेंडर जारी किया गया है।
इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेश अध्यक्ष प्रद्युमन शर्मा ने कहा:"जोन स्तर पर चलने वाला सफाई ठेका पूरी तरह से भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका था। जोन कमिश्नर, ठेकेदारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से कागजों पर 38-38 कर्मचारियों की 'भूतिया लिस्ट' तैयार कर करोड़ों रुपये का भुगतान पार करवा लिया जाता था। जनता से वसूले जाने वाले टैक्स के बदले उन्हें सिर्फ गंदगी, जाम नालियां और बीमारियां मिलती थीं। हमने इस गंभीर मुद्दे को नगर निगम मुख्यालय, महापौर, निगम आयुक्त एवं नगरीय प्रशासन विभाग के समक्ष लगातार प्रमुखता से उठाया था।" श्री प्रद्युमन शर्मा ने आगे कहा कि मुख्यालय स्तर से जारी हुआ यह नया टेंडर रायपुर के समस्त करदाताओं, नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनवरत संघर्ष की जीत है। प्रशासन से उम्मीद है कि नया टेंडर आवंटित करने में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। पूर्व में कार्यरत दागी और खानापूर्ति करने वाली कंपनियों को प्रक्रिया से बाहर रखा जाए, जो बिना कार्य किए करोड़ों के बिल पास करवा लेती थीं। केवल उन सक्षम तकनीकी व वित्तीय रूप से सुदृढ़ एजेंसियों को ही कार्य सौंपा जाए जो रायपुर को स्वच्छ, सुंदर और स्वास्थ्यप्रद बनाने के संकल्प को धरातल पर साकार कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग यह स्पष्ट करता है कि नई व्यवस्था लागू होने तक और शहर में पूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित होने तक हमारी निगरानी और जनहित का यह संघर्ष जारी रहेगा।