बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में संचालित पोटा केबिन आवासीय शालाओं में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त होने के बाद स्टाफ की कमी का गंभीर संकट सामने आया है। वर्षों से विभिन्न विभागों और कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजे जाने के बाद कई आवासीय स्कूलों में आवश्यक मानव संसाधन की कमी महसूस की जा रही है। इससे करीब 32 हजार आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा और दैनिक व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सुदूर इलाकों की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
पोटा केबिन शालाएं बस्तर के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। इन आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई के साथ भोजन, सुरक्षा और छात्रावास संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ जरूरी होता है। मौजूदा हालात में कई स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
स्थायी समाधान की मांग तेज
शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि संलग्नीकरण समाप्त करना प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था भी जरूरी है। यदि समय रहते पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया तो दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के हजारों बच्चों की पढ़ाई और आवासीय स्कूलों का संचालन प्रभावित हो सकता है। शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जल्द स्थायी समाधान की मांग तेज हो रही है।