रायपुर, 4 नवंबर 2026। बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण कर भारत लाए जाने और केंद्रीय जांच एजेंसियों की सख्ती के बावजूद अवैध सट्टेबाजी का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। पुलिस और साइबर ट्रैकिंग से बचने के लिए इस सिंडिकेट ने अपने काम करने के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके तहत अब नए डोमेन और तकनीकी माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि इंटरनेट पर अभी भी 'महादेवऑनलाइन डॉट कॉम' और 'महादेवबुक्स डॉट कॉम' जैसे डोमेन नेम सक्रिय हैं, जिनके जरिए अवैध कमाई का खेल जारी है। इनमें से एक वेबसाइट भारत में सीधे ओपन नहीं होती, जिसे खोलने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का उपयोग किया जा रहा है, जिसका सर्वर लोकेशन मुंबई, महाराष्ट्र दर्शाया गया है। वहीं, दूसरी वेबसाइट 'महादेवबुक्स डॉट कॉम' आसानी से खुल रही है, जिसका सर्वर लोकेशन कैलिफोर्निया के सैन जोजे दिखाया गया है।
इस नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें यूजर रजिस्ट्रेशन या ऑटोमेटेड यूजर डैशबोर्ड जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती है। वेबसाइट का इस्तेमाल केवल यूजर्स को आकर्षित करने और निर्देश देने के लिए किया जाता है, जबकि अधिकांश सेवाओं और पंजीकरण के लिए सीधे व्हाट्सएप सपोर्ट के माध्यम से जुड़ने का विकल्प दिया जाता है। पैसे का लेन-देन भी ऑपरेटर्स द्वारा यूपीआई या अन्य बैंक खातों के जरिए किया जाता है, ताकि मुख्य सर्वर और सरगनाओं तक एजेंसियों की पहुंच को उलझाया जा सके।