धमतरी। समय पर हुई स्वास्थ्य जांच किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकती है। धमतरी के नन्हे भाव्यांश साहू की कहानी इसका उदाहरण है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत संचालित ‘चिरायु योजना’ के माध्यम से बच्चे में जन्मजात हृदयरोग की समय रहते पहचान हुई और उसे आगे के उपचार के लिए प्रक्रिया शुरू की गई।
आंगनबाड़ी में जांच के दौरान सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में शहरी चिरायु टीम ने धमतरी के जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसी दौरान चिकित्सकीय जांच में भाव्यांश में जन्मजात हृदयरोग से जुड़े लक्षण सामने आए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य टीम ने बच्चे को आगे की जांच और उच्च स्तरीय उपचार के लिए रेफर किया, ताकि समय रहते आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
समय पर पहचान से उपचार की राह हुई आसान
चिरायु योजना के तहत बच्चों में जन्मजात बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की स्क्रीनिंग की जाती है। भाव्यांश के मामले में भी नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बीमारी की पहचान होने से परिवार को आगे के उपचार की दिशा में मदद मिली।
समय पर बीमारी की जानकारी मिलने के बाद बच्चे के उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ी और परिवार को उसके स्वास्थ्य को लेकर नई उम्मीद मिली।
परिवार के लिए राहत का कारण बनी योजना
भाव्यांश के परिवार के लिए यह प्रक्रिया राहत देने वाली रही। बच्चे की बीमारी का समय रहते पता चलने और उपचार की सुविधा मिलने से परिवार को उसके बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी।
यह मामला बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से समय पर बीमारी की पहचान के महत्व को भी सामने लाता है।