रायपुर, 18 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के सरकारी कार्यालयों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बावजूद कई विभागों की ओर से अग्रिम भुगतान नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकारी कनेक्शनों पर बकाया और प्री-पेमेंट में देरी के चलते केंद्र से मिलने वाले अनुदान की करीब एक-तिहाई राशि अटक गई है। 

32,741 सरकारी कनेक्शन प्री-पेड व्यवस्था में

केंद्र की गाइडलाइन के तहत 1 अगस्त 2026 से विकासखंड स्तर तक के सरकारी विभागों के स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेश में ऐसे 32,741 सरकारी बिजली कनेक्शन चिह्नित किए गए हैं। इनमें से करीब 85 प्रतिशत सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। 

व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सरकारी कनेक्शनों के अलग-अलग समूह बनाए गए हैं और उनकी निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद अब तक प्री-पेमेंट के रूप में करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये ही प्राप्त होने की जानकारी है।

करीब 3 हजार करोड़ रुपये का बिजली बकाया

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के करीब 45 सरकारी विभागों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे अधिक बिजली खपत वाले विभागों से भुगतान को लेकर विशेष रूप से अपेक्षा की जा रही है। 

पुराने बकाए के निपटारे के लिए चरणबद्ध भुगतान का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जुलाई-सितंबर 2026, अक्टूबर-दिसंबर 2026, जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027 की अवधि में भुगतान किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। 

आरडीएसएस फंड पर पड़ा असर

प्री-पेड व्यवस्था और सरकारी बिजली कनेक्शनों के बकाए का मामला आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने और बकाया राशि के निपटारे जैसी शर्तों से केंद्रीय सहायता की अगली किस्त जुड़ी हुई है। भुगतान में देरी के चलते राज्य को मिलने वाली केंद्रीय राशि का एक हिस्सा अटकने की स्थिति बनी है। 

अब सरकारी विभागों के सामने पुराने बिजली बकाए का भुगतान करने के साथ प्री-पेड मीटरों में नियमित अग्रिम राशि जमा कराने की चुनौती है। इससे बिजली भुगतान व्यवस्था को नियमित करने और सरकारी कनेक्शनों के बढ़ते बकाए को नियंत्रित करने पर जोर है।