रायपुर, 14 अगस्त 2026 : रायपुर नगर पालिक निगम में लगातार गायब हो रही महत्वपूर्ण शासकीय फाइलों और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में बरती जा रही लीपापोती को लेकर विवाद गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग (IHPRC) के अध्यक्ष प्रद्युम्न शर्मा ने प्रेस बयान जारी कर नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे जनता के करों के पैसों से जुड़े घोटालों पर पर्दा डालने का सुनियोजित खेल करार देते हुए कहा कि निगम में निर्माण, नियुक्ति व भुगतान संबंधी फाइलें संदिग्ध परिस्थितियों में गायब की जा रही हैं।

प्रद्युम्न शर्मा ने आरोप लगाया कि निगम में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को दबाने के लिए एक नया तरीका अपनाया जा रहा है, जिसमें फाइलों के गायब होने के बाद एफआईआर (FIR) और विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) मांगने का कागजी प्रपंच रचा जाता है। उन्होंने उद्यान विभाग की गायब फाइल और अधीक्षक श्री श्याम सोनी व उनके रिश्तेदार से जुड़े डाटा सेंटर की नियुक्ति व भुगतान संबंधी मूल फाइल (नस्ती क्रमांक 319017/2026) का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षित दफ्तरों से केवल भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी फाइलें ही अचानक कैसे गायब हो जाती हैं।

आईएचआरपीसी ने मांग की है कि रायपुर नगर निगम में गायब हुई सभी संदिग्ध फाइलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच ईओडब्ल्यू (EOW) या एसीबी (ACB) से कराई जाए। साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड और ई-ऑफिस व्यवस्था के दौर में मूल फाइलों के गायब होने के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जाए। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने इस मामले में तत्काल कठोर कदम नहीं उठाए, तो आयोग जनहित में न्यायालय और उच्च स्तरीय फोरम का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होगा।