कांकेर, 3 अगस्त। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलती एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। कोयलीबेड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत कंदाड़ी अंतर्गत आने वाले आश्रित गांव खैरीपदर में मलेरिया बीमारी विकराल रूप ले चुकी है। गांव के अधिकांश निवासी इस समय बीमारी की चपेट में हैं, लेकिन शासकीय चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार करनी पड़ रही है।
इसी बीच इलाके से एक हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जहां एक लाचार मां अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए उफनती नदी के किनारे घंटों रेत पर बैठी रही। वह अपने घर वापस लौटने के लिए नाव की प्रतीक्षा कर रही थी। यह मार्मिक तस्वीर दूरस्थ वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में चरमराई चिकित्सा व्यवस्था की खौफनाक सच्चाई को उजागर करती है, जहां नागरिकों को सामान्य उपचार के लिए भी अपनी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य दल के न पहुंचने के कारण संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। गंभीर मरीजों को समय पर सही उपचार न मिलने से स्थिति हर बीतते दिन के साथ गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांव में तत्काल मेडिकल टीम भेजकर शिविर लगाया जाए और मरीजों को उचित दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।