धमतरी, 1 अक्टूबर 2026। मानसून के अंतिम दौर में हुई भारी बारिश के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए धमतरी जिले में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। ‘स्रोत से घर तक सुरक्षित पानी और हर बूंद में भरोसा’ के संकल्प के साथ जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) जल जीवन मिशन के तहत पानी की शुद्धता, क्लोरीनेशन और जल टंकियों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। अभियान का उद्देश्य बारिश के बाद जलभराव से होने वाली डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए व ई जैसी जलजनित बीमारियों की रोकथाम करना है।

16,024 जलस्रोतों से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति

धमतरी जिले में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए व्यापक जल अधोसंरचना तैयार की गई है। जिले में कुल 16,024 पेयजल स्रोत हैं। इनमें 9,981 हैंडपंप, 718 नल-जल योजनाएं और 2 वृहद समूह जल प्रदाय योजनाएं शामिल हैं। ये योजनाएं ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पेयजल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सुरक्षित भंडारण के लिए जिले में 548 जल टंकियां भी बनाई गई हैं।

पेयजल को कीटाणुरहित रखने के लिए जिले में 529 आधुनिक क्लोरिनेटर मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों में नमक और पानी के घोल से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए सक्रिय क्लोरीन तैयार किया जाता है। यह पानी में मौजूद सूक्ष्मजीवों और हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने में मदद करता है।

3,110 ‘जल बहिनियां’ कर रहीं पानी की प्राथमिक जांच

पेयजल की गुणवत्ता जांच में जनभागीदारी को मजबूत करने के लिए जिले के 623 गांवों में फील्ड टेस्ट किट (FTK) उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक गांव से 5-5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इस तरह जिले में कुल 3,110 प्रशिक्षित ‘जल बहिनियां’ गांव-गांव में पानी की प्राथमिक स्तर पर नियमित जांच कर रही हैं।

जांच के दौरान यदि पानी की गुणवत्ता में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दी जाती है। इसके बाद विभागीय अमले द्वारा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है। इससे जल गुणवत्ता की निगरानी में ग्रामीण महिलाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।

हर सप्ताह 120 घरों और 15 जल टंकियों के नमूनों की जांच

पेयजल की निगरानी को केवल जलस्रोतों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे उपभोक्ताओं के घर तक विस्तारित किया गया है। जिले के चारों विकासखंड कुरूद, मगरलोड, धमतरी और नगरी से प्रत्येक सप्ताह 30-30 घरेलू जल नमूने, यानी कुल 120 नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कराया जा रहा है।

इसके साथ ही हर सप्ताह 15 जल टंकियों के पानी की भी विशेष निगरानी की जा रही है। इस व्यवस्था के जरिए जलस्रोत से लेकर घर तक पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पानी में बदलाव दिखे तो तुरंत दें सूचना

जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने लोगों से पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि पानी के रंग, गंध या स्वाद में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल ग्राम पंचायत या PHE विभाग को दें। समय पर सूचना मिलने से पानी की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई जल्द की जा सकेगी।