रायपुर, 8 सितंबर 2026। आस्था, परंपरा और जनभागीदारी के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस बार भी पारंपरिक गरिमा और भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा, स्वच्छता, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की।

बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन, प्रशासनिक अधिकारी और टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य मौजूद रहे।

बहुमत से बलराम मांझी बने दशहरा समिति के उपाध्यक्ष

बैठक के दौरान बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। हाथ उठाकर हुए मतदान में बलराम मांझी को स्पष्ट बहुमत मिला और उन्हें समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।

नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव समिति के सामने रखे।

बस्तर दशहरा को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर

दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के तहत हर वर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखने की बात कही।

उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे पर्व की मौलिकता और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पर्व के दौरान समानांतर आयोजनों को अनुमति नहीं देने, देवस्थलों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रमुख पूजा स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग एवं स्थायी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प

बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह परंपरा 1423 से निरंतर चली आ रही है और इसे वैश्विक सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। बैठक में बस्तर दशहरा को UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।

उन्होंने मावली परघाव से जुड़े मार्गों और स्थलों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं तथा आंगा देव के सम्मानजनक आगमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी धारण करने का आग्रह किया। मेंबर-मेंबरीन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके मासिक मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव भी रखा गया।

1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित

बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने वर्ष 2026 के बस्तर दशहरा पर्व के लिए 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। इसमें विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।

इसके अलावा पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश, सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। पारंपरिक पूजा विधानों को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन कराने पर जोर दिया गया।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर प्रशासन की तैयारी

कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने पर्व को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रमुख स्थलों पर व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के साथ सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

बैठक में मांझी-चालकी, पुजारियों और समिति सदस्यों ने भी पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सुझाव दिए। अब समिति का लक्ष्य बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा को संरक्षित रखते हुए 2026 के आयोजन को भव्य, सुरक्षित और गरिमापूर्ण बनाना है।