अंबिकापुर, 31 अगस्त 2026। राजमाता श्रीमती देवेंद्रकुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में गले पर गंभीर और जानलेवा चोट के मामलों में इस वर्ष बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में जहां ऐसे 10 मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2026 में अब तक 18 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और आवश्यक उपचार मिलने से सभी मरीजों की जान बचाने में चिकित्सकों को सफलता मिली है।
अस्पताल में पहुंचे मरीजों की स्थिति गंभीर होने के बावजूद चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। गले में लगी गंभीर चोट के कारण मरीजों के लिए समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण था। चिकित्सकों की तत्परता और विशेषज्ञ उपचार के चलते मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई और उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
समय पर इलाज से बची मरीजों की जान
चिकित्सकों के अनुसार गले पर गंभीर चोट लगने के मामलों में तत्काल चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी होता है। ऐसे मामलों में देरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता से गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों को समय पर उपचार मिल सका।
वर्ष 2026 में अब तक 18 मरीजों का सफल उपचार होना अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। चिकित्सकीय टीम की तत्परता से सभी मरीजों की जान बचाई जा सकी।
विशेषज्ञ उपचार से मरीजों को मिला जीवनदान
अस्पताल में गंभीर चोट के मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीजों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक उपचार किया जा रहा है। इस दौरान मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई। समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति वाले मरीजों को भी बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकी।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि गंभीर चोट की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
2025 की तुलना में बढ़े मामले
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में गले पर गंभीर चोट के 10 मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे। वहीं 2026 में अब तक यह संख्या बढ़कर 18 हो गई है। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में ऐसे मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के माध्यम से इन मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे सभी 18 मरीजों की जान बचाई जा सकी। यह गंभीर चोट के मामलों में त्वरित चिकित्सा व्यवस्था की अहमियत को भी दर्शाता है।