रायपुर, 9 सितंबर 2026। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने प्रदेश के सभी नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाली नगर पालिकाओं के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुबह शहर में निकलकर साफ-सफाई, निर्माण कार्य और नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति देखें और सामने आने वाली समस्याओं का मौके पर समाधान कराएं।
संपत्ति कर के लिए बढ़ेगी ऑनलाइन सुविधा
समीक्षा बैठक में निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों का सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अधिक से अधिक निकायों में संपत्ति कर के ऑनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने पर जोर दिया गया।
अरुण साव ने निर्माण कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निर्माणाधीन कार्यों का नियमित निरीक्षण करने को कहा। राजस्व वसूली, निर्माण, स्वच्छता और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी कार्यपद्धति विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर तत्काल कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध कब्जे और अतिक्रमण सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि अनियोजित निर्माण से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन सुबह मैदानी भ्रमण करने के निर्देश दिए। इससे शहर की वास्तविक स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति और नागरिकों की समस्याओं का सीधे पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए शहरों की अधोसंरचना भी भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार होनी चाहिए।
अगले 50 वर्षों की जल जरूरतों पर बनेगी रणनीति
बैठक में जल संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक योजना बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अरुण साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल आवश्यकता को ध्यान में रखकर चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने तथा शहरों के सभी घरों तक पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। भविष्य में जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने की जरूरत बताई गई।
शहरों में दिखे निकायों की सक्रिय भूमिका
नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि निकायों की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्य और योजनाएं पूरी करना नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना भी है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप रोडमैप तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का असर केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। खाली स्थानों की पहचान कर सघन वृक्षारोपण और अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने, फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने तथा एनजीटी के निर्देशों का गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए गए।
नालंदा परिसरों सहित कई योजनाओं की समीक्षा
बैठक में निर्माणाधीन नालंदा परिसरों को जल्द शुरू करने के लिए फर्नीचर, आईटी सुविधाओं, पुस्तकों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरा करने पर जोर दिया गया।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं, अधोसंरचना कार्यों, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, पीएम स्वनिधि और पीएम ई-बस सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति देखी गई। इसके अलावा राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, ऊर्जा बिल ऑडिट, एबीसी नियम, गोधाम योजना, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की भी समीक्षा की गई।