रायपुर, 4 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच अब कथित तौर पर बरामद हुई एक लाल डायरी के इर्द-गिर्द भी केंद्रित हो गई है। मुख्य लाइजनर के तौर पर जांच के दायरे में आए सतपाल सिंह छाबड़ा के ठिकाने से मिली इस डायरी में हस्तलिखित तरीके से रकम और लेन-देन का विवरण दर्ज होने की बात सामने आई है। पूछताछ के दौरान डायरी के कुछ पन्नों को नष्ट करने की कथित कोशिश ने जांच को और गंभीर बना दिया है।
पूछताछ के दौरान पन्ने नष्ट करने की कोशिश का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान छाबड़ा ने डायरी के दो-तीन पन्ने कथित तौर पर चबाकर नष्ट करने की कोशिश की। वहीं, एक अन्य पन्ने को जेब में छिपाने की बात भी सामने आई, जिसे अधिकारियों ने बरामद कर लिया। जांच एजेंसी इस घटनाक्रम को कथित तौर पर साक्ष्य नष्ट करने के प्रयास के रूप में देख रही है।
अब जांच का फोकस डायरी में दर्ज प्रविष्टियों, उनमें उल्लेखित रकम और उनसे जुड़े लोगों व खातों तक पहुंचने पर है। डायरी में दर्ज विवरण को अन्य वित्तीय दस्तावेजों और बैंक लेन-देन से मिलान किए जाने की प्रक्रिया भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
31 करोड़ रुपये के कथित कमीशन की जांच
ईडी की जांच में सतपाल सिंह छाबड़ा से करीब 31 करोड़ रुपये के कथित अवैध कमीशन के लेन-देन को जोड़े जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त हुई और इसके वास्तविक इस्तेमाल तथा मनी ट्रेल की पड़ताल की जा रही है।
जांच में बीज निगम से जुड़े 13 विक्रेताओं से कथित तौर पर 21.33 करोड़ रुपये प्राप्त होने की बात भी सामने आई है। इसमें बैंकिंग माध्यम से करीब 11.19 करोड़ रुपये और नकद करीब 10.13 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया है।
कमीशन के बदले काम दिलाने का आरोप
जांच के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच बीज निगम से जुड़े कार्यों में कुछ कंपनियों के साथ छाबड़ा की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और बिलिंग जैसे कार्यों से जुड़े भुगतान में कथित तौर पर 20 से 32 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने का आरोप है।
ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित कमीशन की रकम किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंची और इसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में बैंक खातों, नकद लेन-देन और कारोबारी संस्थाओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच अहम मानी जा रही है।
परिवार और कारोबारी संस्थाओं के जरिए रकम लगाने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित कमीशन की रकम को छाबड़ा के परिवार, एचयूएफ और उससे जुड़ी कारोबारी संस्थाओं के माध्यम से इस्तेमाल किए जाने की भी जांच की जा रही है। एजेंसी कथित अपराध से अर्जित आय और उससे बनाई गई संपत्तियों के बीच संबंध तलाश रही है।
लाल डायरी में दर्ज प्रविष्टियां इस जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती हैं। खास तौर पर डायरी में लिखी रकम का बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों से मिलान कर मनी ट्रेल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रभावशाली लोगों से कथित संबंधों की भी पड़ताल
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान छाबड़ा प्रभावशाली नेताओं के लिए वित्तीय समन्वयक की भूमिका निभाता था। अब जांच एजेंसी कथित लेन-देन और उससे जुड़े लोगों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
हालांकि मामले में सामने आए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं। कथित कमीशन, संपत्तियों और अन्य लेन-देन को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल लाल डायरी के बचे हुए पन्नों और उनसे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से इस मामले में आगे कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।