गरियाबंद। जिले के मैनपुर विकासखंड में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर निर्माणाधीन पुल लंबे समय से अधूरा पड़ा है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी अधूरे पुल और लोहे की सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालिया रिपोर्टों में पुल का निर्माण करीब पांच से छह साल से अधूरा बताए जाने की जानकारी सामने आई है। 

उफनती नदी के बीच पढ़ाई का सफर

देहारगुड़ा के बच्चों को पढ़ाई के लिए खामभाठा की ओर जाना पड़ता है और दोनों गांवों के बीच पैरी नदी पड़ती है। सामान्य दिनों में नदी पार करना संभव हो सकता है, लेकिन बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने से रास्ता बेहद जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे में बच्चे निर्माणाधीन पुल के पिलर्स तक पहुंचने के लिए लोहे की सीढ़ियों का इस्तेमाल कर नदी पार करने को मजबूर हैं। 

पुल पर निकले सरिए भी बढ़ा रहे खतरा

निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण पुल पर जगह-जगह लोहे के सरिए बाहर निकले हुए हैं और पिलर्स के आसपास झाड़ियां उग आई हैं। ऐसे रास्ते से गुजरना बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बारिश के दौरान फिसलन और नदी के तेज बहाव के कारण हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।

वर्षों से अधूरा निर्माण, अब समाधान की मांग

स्थानीय लोगों के लिए यह पुल लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और बारिश के दौरान किसी तरह की अनहोनी न हो, इसके लिए पुल का निर्माण जल्द पूरा करने तथा सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन की ओर से भी समस्या के समाधान की बात कही गई है। 

बारिश के मौसम में बच्चों को इस तरह जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि शिक्षा तक पहुंच के लिए सुरक्षित परिवहन और मार्ग की व्यवस्था आखिर कब सुनिश्चित होगी। पुल का निर्माण पूरा होने से देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच आवागमन आसान होने के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।